कभी वो दिन भी आएगा
जब अपना राज देखेंगे
जब अपनी ही ज़मीन होगी
जब अपना आसमान होगा
शहीदों के मजारों पर
लगेंगे हर बरस मेले
वतन पर मिटने वालों का
यही बाक़ी निशां होगा

स्वतंत्रता सेनानी अशफाकुल्ला खान द्वारा रचित

इसे वेदांत भारद्वाज ने संगीतबद्ध किया है और इसकी भावभीनी प्रस्तुति दी है। यह प्रस्तुति संकट से घिरे हमारे राष्ट्र के नायकों और मानववादियों को संबोधित है, उनकी बहादुरी और सब कुछ को बचाने सुरक्षित रखने की उनकी अटूट ज़िद को सलाम करती है।

वेदांत कर्नाटक और हिंदुस्तानी संगीत के गायक हैं और अपनी सूफ़ी और भक्ति गायकी के लिए भी जाने जाते हैं। यह सबसे आगे खड़े होकर मुकाबला कर रहे कोविड-19 योद्धाओं और नागरिकों के सम्मान में है जो आंसू, तकलीफ और अभाव के मलबे से घिरे देश को वापस खड़ा करने में दिन रात लगे हुए हैं।