अभिनेता इरफान खान को चाहने वाले हर दिल की आज यही आरज़ू है, बावजूद इस इल्म के, कि अब वे इस दुनिया से रुखसत ले चुके हैं । इस वक्त, प्रशंसकों की नम आंखों के आगे इरफान जिंदगी के कई किरदार का रूप लिए गुजर रहे होंगे। यह वही किरदार है जिनमें प्रशंसक – दर्शक खुद को देखते रहे हैं ।दरअसल अपने बेफिक्र अंदाज में इरफान कला की उस ऊंचाई तक पहुंचते रहे हैं जहां पर्दे पर दर्शक उन्हें देखते कहता रहा है, अरे वाह, आप तो मेरी ही कहानी कहे जा रहे हैं, मेरी ही जुबां बोले जा रहे हैं।

अलग-अलग शक्लों में इरफान दिनचर्या के झमेलों, उहापोहों, तकलीफों , मासूमियतों और सुखों को पेश करते हुए हमेशा दर्शकों के इर्द-गिर्द ही रहे। कमर्शियल फिल्मों में भी अपनी जननायकत्व वाली छवि से हटते नहीं दिखाई पड़े। दरअसल वे जननायक ही रहे। उनकी फिल्मों की एक लंबी फेहरिस्त है जो 1988 में मीरा नायर निर्देशित फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ से शुरू होकर 2020 में ‘अंग्रेजी मीडियम’ पर खत्म होती है।

जाहिर है अपनी भूमिका का लोहा मनवाने वाले इरफान कई पुरस्कारों के हकदार रहे।अपनी छोटी – बड़ी भूमिकाओं में वह हमेशा अपनी पहचान छोड़ते। चाहे सलाम मुंबई में ‘लेटर राइटर’ की भूमिका हो या फिर फिल्म,’मकबूल’ में बेखौफ इश्क के अंजाम में मानसिक रोगी मकबूल हो, या फिर हैदर फिल्म में रूहदार बने बेवफाई के गवाह हो। फिल्म ‘लंचबॉक्स ‘ में आहिस्ता -आहिस्ता, बेहद सजग साजन फर्नांडीस (इरफान ) का इश्क की राह में कदम रखना बेहद आत्मीय लगता है। ऐसी तमाम बातें जो हमारी जिंदगी से दूर हों इरफान उसे हमारी संवेदना के विस्तार में ले आते हैं।

संभवत: इरफान की इसी कलाकारी की जादूगरी है कि इस गमगीन बेला में भी हम उनके किरदारों को ही याद कर रहे हैं। काश, आज भी वे एक किरदार के रूप में होते .. …और कल किसी नई भूमिका में दिखते।

(Image: Press Information Bureau, Created: 2011-04-01, The President, Smt. Pratibha Devisingh Patil presenting the Padma Shri Award to Shri Sahabzade Irrfan Ali Khan, at an Investiture Ceremony II, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on April 01, 2011.jpg, https://pib.gov.in/newsite/photo.aspx?photoid=34371,CNR :37361 Photo ID :34371)