आज अभिनेता ऋषि कपूर हमारे बीच नहीं रहे , लगा जैसे, हमारे भीतर प्रेम का एक सोत्र सूख गया जो हमारी जिंदगी को नम करता रहा था। जनसाधारण के शुष्क और संघर्षशील जीवन में प्रेम के सपने बचाए रखने वाले ऋषि कपूर आज महायात्रा पर निकल चुके हैं, बस अब, हमारे हिस्से उनकी तस्वीरें और किरदार की छवि बची है।

दरअसल , अभिनेता और दर्शक के बीच का सेतु किरदार ही होता है जिसकी मार्फत कभी अभिनेता दर्शक का आईना हो जाता है तो कभी दर्शकों की स्वप्निल जिंदगी का सौदागर। किशोर स्कूली बच्चे के जीवन में प्रेम का पहला एहसास , एक यादगार दृश्य है जिसे ऋषि कपूर ने फिल्म ‘मेरा नाम जोकर ‘ (1970) ,में बखूबी अभिनीत किया है। यह किशोर ऋषि कपूर की पहली फिल्म थी । हालांकि तीन वर्ष की उम्र में ऋषि ने फिल्म ‘श्री 420’ में भी एक छोटी सी भूमिका निभाई थी। हीरो के तौर पर उनकी पहली फिल्म ‘बॉबी’ (1973) थी। इस फिल्म में रोमांटिक हीरो की जो छवि ऋषि ने पेश की, वह 70 के दशक के बाद भी आज हर दिल अजीज है। उसके बाद प्रेम की कई कहानियां ऋषि के नाम होती गई। इस सिलसिले की फेहरिस्त में कई हिट फिल्में शामिल है मसलन, ‘हम किसी से कम नहीं’, ‘कर्ज़ ‘, ‘लैला मजनूं’, ‘सरगम’, ‘नगीना ‘,’चांदनी ‘, ‘हिना ‘, ‘बोल राधा बोल’.. आदि आदि।

कई फिल्मों में ऋषि चुलबुले प्रेमी की तरह दिखे ,तो कई फिल्मों में वे शांत और गंभीर आशिक के तौर पर भी नजर आए। फिल्म ‘प्रेम रोग’ (1983) में उनका किरदार क्रांतिकारी और परिपक्व नजर आता है। किरदार की प्रस्तुति की यह परिपक्वता उनके आगे की फिल्मों के लिए राह बनाती दिखती है। यह राह, दरअसल हीरो और उसकी उम्र की मुठभेड़ से कई बार खुलती है तो कई बार बंद हो जाती हैं।

बहरहाल, दर्शकों के दिलों पर राज करने वाला हीरो अंततः एक अभिनेता होता है जो कई किरदारों को जीने वाला होता है। ऋषि ने अपने अभिनेता पर अपनी उम्र हावी होने नहीं दी। सहायक अभिनेता के तौर पर कई फिल्मों में उनके रोल को काफी तारीफ मिली जिसमें फिल्म ‘फना’, ‘नमस्ते लंदन’, ‘पटियाला हाउस ‘ आदि हैं। ‘102 नॉट आउट’, ऋषि कपूर की एक अलग अंदाज की फिल्म रही। कुछ फिल्में उन्होंने निर्देशित भी की थीं। अपनी अस्वस्थता के दौरान भी उन्होंने दो फिल्मों में अभिनय किया, वे फिल्में थी ‘झूठा कहीं का ‘और ‘दि बॉडी।’ ‘दि बॉडी ‘ ही उनकी आखिरी प्रदर्शित फिल्म रही ।

आज उनकी अंतिम विदाई की बेला है। सबकी आंखें नम है पर दूर कहीं हवाओं में ‘सरगम’ फिल्म का वह गीत गूंजता लग रहा है …
‘…हम तो चले परदेस ,हम परदेसी हो गए / छूटा अपना देश हम परदेसी हो गए…’