गांधीजी ने अपनी किताब ‘हिंद स्वराज्य’ में कहा है कि रेल गाड़ी आएगी तो महामारी लाएगी, अभी महामारी रेलगाड़ी से नहीं , हवाई जहाज से आई है। कोविड-19 महामारी चीन से हवाई सफर कर दुनिया के कई छोटे – बड़े देशों में पहुंच गई है। इस महामारी के वैश्विक प्रसार ने पूरी दुनिया को बंदी के कगार पर पहुंचा दिया है।तेज रफ्तार से भागने वाली दुनिया अभी रुक गई है। उसके ज्यादातर कामकाज ठप्प हैं । कारोबार बंद है क्योंकि कामगार घरों में कैद हैं।

कोविड-19 महामारी का ग्रहण हर छोटे-बड़े देश को अपने शिकंजे में कस लिया है। छोटे – बड़े सारे कारोबारी अपने भविष्य की कल्पना से डर रहे हैं।छोटे – मध्यम श्रेणी के कारोबार जो अपने देशों के कामगार और संसाधन के भरोसे चल रहे थे , भविष्य में उनकी पुनर्वापसी संभव दिख रही है , लेकिन बड़े कारोबारी जिनका कामकाज आउटसोर्सिंग के जरिए चल रहा था उनके सामने समस्या विकट है।

दूसरे देश जो लॉकडाउन है, वहां उनके निवेश डूबते नजर आ रहे हैं। मसलन , तमाम यूरोपियन और अमेरिकन कंपनियां दूसरे विकासशील देशों में आउटसोर्सिंग के जरिए सामान सस्ते दरों पर बनवाती रही हैं और अपने ब्रांड का ठप्पा लगाकर, लागत से कई गुना ऊंचे दरों पर बेचती रही हैं और मुनाफा का बाजार बनाती रही हैं। इस तरह अमेरिका और यूरोपीय देशों के कारोबारी मुनाफा कमाते रहे हैं । इन विकसित देशों का ज्यादातर धंधा बाजार में अधिकाधिक मुनाफा कमाने का रहा है जिसके आसरे उनके सारे ऐशो – आराम और ऐश्वर्य हैं लेकिन महामारी के इस दौर में सब कुछ उथल पुथल हो चुका है । फलत: गांधी की स्थानीयता और आत्मनिर्भरता फिर लोगों की सोच के केंद्र में आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर काम काज न सिर्फ लोगों को आत्मनिर्भर बनाते हैं बल्कि पूंजी का विकेंद्रीयकरण भी करते हैं ।हालांकि इसमें मुनाफा का बड़ा खेल संभव नहीं हो पाता है लेकिन कारोबार की निरंतरता बरकरार रहती है जो आज की हालात में बुरी तरह गिरती अर्थव्यवस्था को बचाने का बड़ा जरिया साबित हो सकता है। 

इसी तरह कारोबार के उच्च स्तर से लेकर व्यक्ति के निजी कामकाज  तक स्वावलंबन (स्थानीय साझेदारी) एक मानवीय समाधान है जिसमें मनुष्यता और पर्यावरण दोनों बचा रहेगा । बहरहाल, लॉकडॉउन यानी ‘ठहरने की चेतावनी’  हमें सोचने को मजबूर कर रही हैं कि हम अपने आसपास ही रहें, उसे ही सुंदर बनाएं और बापू की बातों  की गहराई को इस संदर्भ में समझे।कल , यानी 12 मई को देश के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि ‘लोकल को वोकल बनाएं।’