वर्तमान समय में देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण के फैलाव को कम करने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया गया। इसकी मियाद ज्यों ज्यों बढ़ती गई, लोगों की तकलीफें बढ़ती गई। इसके बाद महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों से प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया। ऐसे वक्त में जब केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने ही लोगों से मुंह मोड़ लिया, तब मानवता की तस्वीरें सामने आने लगीं। हज़ारों किलोमीटर की यात्रा करने को मजबूर प्रवासी मजदूरों की हालत देखकर नाज अज़हर ने भोपाल में ऐसे मुहिम की शुरुआत कर दी जो धीरे-धीरे एक काफिला बन गया।

भोपाल के कोहेफिजा की रहने वाली नाज अजहर और उनकी बेटी सना अजहर भोपाल के विदिशा रोड बाईपास से सैकड़ों की संख्या में गुजर रहे प्रवासी मजदूरों के लिए फरिश्ता बन कर सामने आईं। यहां से गुजरने वाले मजदूरों के बीच मां-बेटी ने खाना वितरण का काम शुरू किया। 

दरअसल, रमजान के इस महीने में नाज सुबह शेहरी के लिए उठती हैं। एक दिन शेहरी के बाद वह विदिशा बाईपास स्थित अपने फॉर्म पर गयी थी। तभी उनकी मुलाकात यात्रा कर रहे मजदूरों से हुई। ये मदजूर मुंबई से चले थे और पिछले 13 दिनों से लगातार पैदल चल रहे थे और आगे उन्हें हज़ारों किलोमीटर और जाना था। 

नाज कहती हैं कि, “उनकी बातें सुनकर और उनकी हालत देखकर मुझे रोना आ गया। सीधे बाज़ार की तरफ़ दौड़ी लेकिन दुकाने बंद होने की वजह से कुछ नहीं मिला। मैं पूरे दिन परेशान रही।”

अगले दिन शेहरी करने के साथ ही नाज और सना ने करीब 250 से 300 लोगों के लिए खाना-पकाने लगी। वह सुबह-शाम अपनी कार में रोटी, सब्जी, खीचड़ी, दूध, बिस्किट्स, चाय जैसी सामग्रियां भरकर विदिशा रोड बाईपास पहुंच जाती। यह सिलसिला 10 से12 दिनों तक लगातार चलता रहा।

 नाज कहती हैं कि, “रोजा के दौराना खाना पकाना मुश्किल रहा लेकिन तकलीफ नहीं हुई। उनको सुकून से खाते देख हमारी परेशानियां दूर हो जाती थी। इस बार रोजे का भी एहसास भी नहीं हुआ। क्योंकि हमारा सारा दिन खाना पकाने और उनतक पहुंचाने में निकल गया।”

इसी बीच भोपाल के जनसंपर्क समूह से जुड़ी सना ने प्रवासी मजदूरों के हालात के बारे में अपने साथियों को बताया। दरअसल, जनसंपर्क समूह कई समूहों का गठबंधन है। जिसमें एडवा, बीजीवीएस, एमपीडीआरएफ,परिंदे,मानव सेवा समीति जैसे अन्य कई ग्रुप्स जुड़े हुए हैं। जनसंपर्क समूह जनता कर्फ्यू के वक्त से ही सक्रिय है। इस वक्त यह समूह पूरे भोपाल में क़रीब 15 सामुदायिक किचन चला रहा है। 

सना युवा साथियों के समूह परिंदे से जुड़ी हैं। यह समूह सामाजिक कार्यो के लिए सोशल मीडिया के जरिए फंड इकठ्ठा करता है। सना द्वारा दी गयी जानकारी के बाद जनसंपर्क समूह हाईवे पर जायजा लेने पहुंचा। वहां कि स्थिति देख अगले दिन से ही यह लोग बाईपास पर सक्रिय हो गया और यहां ‘मजदूर सहयोग केंद्र’ की स्थापना की गयी। जिसमें खाने के साथ-साथ, जूते-चप्पल,मेडिकल, मास्क व अन्य ज़रुरी चीज़ों की व्यवस्था की गयी। 

सना कहती हैं कि, “अब विदिशा बाईपास पर क़रीब 15 संस्थाएं जुड़ गयी हैं। जो इन मजदूरों की हर संभव मदद कर रही है। शुरू हमने किया लेकिन धीरे-धीरे सबने ज़िम्मेदारी बांट लि है।”

 वहीं, फोन पर बातचीत के दौरान नाज अजहर ने बताया कि, “धीरे-धीरे बाईपास पर मजदूरों की मदद के लिए लोग बढ़ते गए। आरएसएस समूह भी वहां पहुंचा। सभी धर्म के लोगों साथ मिलकर काम कर रहे हैं। लोग चाहे धर्म के आधार पर हमें कितना भी बांटने की कोशिश करें। लेकिन, इंसान कभी भी इंसान से अलग नहीं हो सकता है।”

नाज कहती हैं कि सरकार की तरफ से इन मजदूरों को कोई मदद नहीं मिली। लॉकडाउन करने से पहले इन्हें अपने घर जाने के लिए वक़्त दे दिया जाता तो हालात इतने खराब नहीं होते।