सरोज कुमार

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच बेबसी और लाचारी की तस्वीरें अब रोज़ की बात हो गई हैं। ग़रीबों और मज़दूरों की ज़िंदगी में लॉकडाउन पहाड़ बनकर टूटा है। पहली बार “अमीर इंडिया”और “ग़रीब भारत”का अंतर नंगी आंखों से दिख रहा है। सरकारों के तमाम दावों के बावजूद रोज़ी-रोटी छिन जाने की वजह से लाखों घरों के चूल्हे बुझ गए हैं। पेट की आग के साथ लोग पैदल या ट्रकों-टैंकरों में ठूंस-ठूंस कर हज़ारों किलोमीटर दूर अपने-अपने गांवों को निकल चुके हैं। इन्हें मंज़िल का पता तो है लेकिन रास्ता बहुत कठिन है, पग-पग पर मुश्किलों के कांटे भरे पड़े हैं। ऐसे समय में अगर मदद के लिए कोई हाथ उठे तो वो किसी मसीहा से कम नहीं है। उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में “थाल सेवा”मुहिम एक ऐसे ही मसीहा का नाम है। जिस समय मेरी ऊंगली कंप्यूटर के कीबोर्ड पर चल रही है उस समय तक थाल सेवा की टीम 75 हज़ार से ज़्यादा लोगों तक खाना पहुंचा चुकी है। जब लॉकडाउन शुरू हुआ तब ग़रीबों और मज़दूरों की दयनीय हालत और बेबसी देखकर इस टीम ने यह क़सम खाई कि शहर में कोई भूखा नहीं सोएगा। फिर क्या था, रोज़ाना पौष्टिक और स्वादिष्ट खाने के हज़ारों पैकेट तैयार होने लगे। शुरू में तो थाल सेवा के सदस्यों ने ख़ुद ज़रूरतमंदों को ढूंढ कर खाना खिलाया। लेकिन जब बंदिशें बढ़ीं तो भी हार नहीं मानी और मदद का दूसरा रास्ता ढूंढ लिया। खाने के पैकेट शहर के अलग-अलग पुलिस चौकियों पर रखे जाने लगे और फिर पुलिसवालों की मदद से ज़रूरतमंदों तक पहुंचने लगा। किसी दिन 1500 लोगों तक खाना पहुंचा तो किसी दिन 2300 पैकेट तक बंट गए।हज़ारों लोगों को कच्चा राशन किट भी पहुंचाया गया। इस दौरान साफ़-सफ़ाई और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख़याल रखा गया।

थाल सेवा लॉकडाउन के समय शुरू हुई कोई नई मुहिम नहीं है। दरअसल ग़रीबों और मज़दूरों के पेट भरने की यह सेवा अक्टूबर 2018 में शुरू हुई थी। किसी को मुफ़्त के खाने का बोझ न लगे इसलिए तय किया गया कि भरपेट भोजन की क़ीमत पांच रुपये रखी जाए। हर दिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक सुशीला तिवारी अस्पताल के बाहर थालसेवा का यह आइडिया हिट हो गया और तब से लेकर आज तक रोज़ाना तक़रीबन 1200-1500 लोग यहां छककर दोपहर का भोजन करते हैं। विशेष और प्रशिक्षित खानसामों द्वारा तैयार भोजन में चावल, दाल, सब्ज़ी, सलाद और अचार होता है। मज़दूर, रिक्शा चालक से लेकर इलाज के लिए आए मरीज़ों के तीमारदार तक हर मज़हब, हर जाति और हर तबक़े के लोग दोपहर में यहां अपनी भूख मिटाने पहुंचते हैं। यहां खानेवाले और खिलानेवाले दोनों के चेहरे पर संतुष्टि का भाव होता है। ख़ास बात यह है कि दिव्यांगों और मानसिक तौर पर बीमार लोगों से खाने के पांच रुपये भी नहीं लिए जाते हैं।

बारह लोगों की इस टीम को लीड करनेवाले दिनेश मानसेरा कहते हैं- “ज़िद में हमने थाल सेवा शुरू तो कर दी लेकिन शुरुआत में हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल था कि लगभग मुफ़्त खाने के लिए इतने पैसे आएंगे कहां से। लेकिन जिस ऊपर वाले ने हमें परोपकार की ये सदबुद्धि दी, उसी ने आगे का रास्ता भी दिखाया। कई स्थानीय और जाननेवाले लोग बिना मांगे मदद को आगे आए तो सोशल मीडिया पर भी हमारी इस पहल को भरपूर सहयोग मिला। आज की तारीख़ में कनाडा, दुबई, मॉरीशस और स्कॉटलैंड जैसे देशों से भी इस सेवा के लिए मदद मिल रही है, हर कोई थाल सेवा करने को आतुर है।”

लिटल मिराकल फ़ाउंडेशन के बैनर तले चलने वाली थाल सेवा आज हल्द्वानी के बच्चे से लेकर बूढ़े, ग़रीब से लेकर अमीर और सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक की ज़ुबान पर है। नेताओं और अफ़सरों की टोली ने भी कई बार यहां आकर खाने की गुणवत्ता परखी है। अब दूसरे शहर के लोग इस सेवा को शुरू करने के लिए थाल सेवा की टीम से टिप्स ले रहे हैं। थाल सेवा के अलावा दूसरे रास्तों से भी दिनेश मानसेरा और उनकी टीम शहर की सेवा में अनवरत जुटी है। शहर की आबोहवा स्वच्छ और सुंदर बनी रहे इसके लिए पेड़ सेवा के तहत 32 हेक्टेयर ज़मीन में 3200 पेड़ लगाए गए और लगातार इनकी देखभाल हो रही है। शहर में साफ़-सफ़ाई बनी रहे इसके लिए जगह-जगह डस्टबिन लगाए गए। ग़रीब अपना उपचार करा सकें इसके लिए इस टीम की ओर से पांच रुपये में उपचार सेवा शुरू की गई।

हमारे साथ बातचीत करते हुए दिनेश मानसेरा भावुक हो उठते हैं। कहते है- “सब ऊपर वाला करा रहा है, हम तो बस एक ज़रिया हैं। हमारे साथ काम करने वाले लोग कुछ अलग क़िस्म के इंसान हैं। सब दिल से सोचते हैं, यहां दिमाग़ नहीं चलता। दिमाग़ से तो पैसे के लिए सोचा जाता है। इस तरह के काम के लिए ज़ुनून, दीवानापन और पागलपन चाहिए, साधारण क़िस्म के लोग ये नहीं कर सकते। अब जब तक ऊपरवाला चाहेगा, तब तय ये सेवा चलती रहेगी”

अगर आप भी किसी ज़रूरतमंद तक मदद पहुंचाना चाहते हों या फिर थाल सेवक बनना चाहते हों तो इस पते पर मिलेगी थाल सेवा की टीम-
सेवा की जगह- सुशीला तिवारी अस्पताल, रामपुर, हल्द्वानी, उत्तराखंड
फ़ोन नंबर- 6398829493
फ़ेसबुक पेज- https://www.facebook.com/Thaal-Seva-253632865299073/
ईमेल करें- [email protected]