Author: Deepa Adhikari

वेदांत की भावभीनी प्रस्तुति: अशफाकुल्ला का ‘कभी वो दिन’

वेदांत भारद्वाज ने यह प्रस्तुति संकट से घिरे हमारे राष्ट्र के नायकों और मानववादियों को संबोधित है, उनकी बहादुरी और सब कुछ को बचाने सुरक्षित रखने की उनकी अटूट ज़िद को सलाम करती है।

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हमारे सपनों का घोसला: फ़ैज़ के साथ ‘लॉकडाउन’

लेखक: प्रतिष्ठा श्रोत्रिय ख़ान और मुश्फ़िक ख़ान
हम दोनों शब्दों, किताबों और कविताओं के प्रेमी हैं; हमने ख़ुद को उन ढेर सारी किताबों के पन्नों में लॉकडाउन कर लिया है, जहां हमें तसल्ली और संतुष्टि मिलती है। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1911-1984) की एक कविता हक़ीक़त में हमसे बातें करती है।

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