प्रवासी मजदूरों के लिए फरिश्ता बन कर आईं नाज

रोज़ा के दौराना खाना पकाना मुश्किल रहा लेकिन तकलीफ नहीं हुई। उनको सुकून से खाते देख हमारी परेशानियां दूर हो जाती थी। इस बार रोज़े का एहसास भी नहीं हुआ।

पीढ़ियों की डिस्टेंसिंग पाटते गुमनाम योद्धा

महामारी के इस दौर में सरकारी निर्देश का पालन करते हुए कई एनजीओ लगातार वंचित लोगों की मदद कर रहे हैं। दरअसल, इन संस्थाओं का चुपचाप प्रयास पीढ़ियों के डिस्टेंसिंग को मिटाने का प्रयास है जो कल भी रहा है और आज भी है ।

मात्र 642 रुपए की यह मदद पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बनी

कोविड-19 महामारी के खिलाफ जारी जंग में बड़े-बड़े कॉरपोरेट संस्थानों से लेकर सभी वर्गों के नागरिक भी अपनी-अपनी हैसियत के हिसाब से देश के प्रधानमंत्री और अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा स्थापित राहत कोष के लिए बड़ी उदारता के साथ धनराशि दे रहे हैं। ऐसे में मात्र 642 रुपए की एक ऐसी ही मदद सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

इंडसइंड बैंक MyyIndia : कोविद -19 नायकों को भारत का सलाम

IndusInd Bank MyyIndia एक विशेष कार्यक्रम है, जिसमें फिल्म और मनोरंजन उद्योग की 30 से अधिक हस्तियों ने भारत के उन लोगों को धन्यवाद और सलाम किया है, जिन्होंने कोविद -19 संकट के दौरान अपने नेक कर्मों से इंसानियत की मिसाल कायम करी है

IndusInd Bank MyyIndia: कोविड-19 के नायकों से प्रभावित और जस्सी की गुरबानी से विभोर हुईं सारा

INDUSIND BANK MYYINDIA: लॉकडाउन के दौरान चारों ओर से नेकी, सेवा और सद्भावना की कहानियां सामने आ रही हैं। आज हमारे साथ फ़िल्म अभिनेत्री सारा अली ख़ान जुड़ी हुई हैं जो उन कोविड नायकों की एक अत्यंत सुंदर कहानी को याद कर रही हैं, जिन्होंने ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए धर्म और मज़हब को किनारे रख दिया है।

वह हमारे दिलों का मजनूं था

आज अभिनेता ऋषि कपूर हमारे बीच नहीं रहे , लगा जैसे, हमारे भीतर प्रेम का एक सोत्र सूख गया जो हमारी जिंदगी को नम करता रहा था। जनसाधारण के शुष्क और संघर्षशील जीवन में प्रेम के सपने बचाए रखने वाले ऋषि कपूर आज महायात्रा पर निकल चुके हैं, बस अब, हमारे हिस्से उनकी तस्वीरें और किरदार की छवि बची है।

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ग़रीबों, बेसहारों की “थालसेवा”

कहते हैं भूखे को खाना खिलाना और ज़रूरतमंद की मदद करना दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य है। कोरोना संकट के बीच देश भर से हमने नेकी की कई ऐसी तस्वीरें देखीं और कई क़िस्से सुने। एक ऐसी ही अथक “थाल सेवा”मुहिम उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में चल रही है।

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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

इस वीडियो में आप देखेंगे कि, एक शख्स नमाज़ अदा कर रहे हैं और विनोद दुआ हिंदू परंपरा में पूजा करने की विधि के अनुसार अपना दोनों हाथ जोड़कर उसके साथ में खड़े हैं।

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लॉकडाउन में महिला SI ने पूरी की पंडित की कमी, गूगल के सहयोग से कराई शादी

लक्ष्मण चौधरी की शादी ऋतु चौधरी के साथ करीब चार महीने पहले तय की गयी थी। लॉकडाउन में विवाह करने के लिए लक्ष्मण चौधरी ने गांव के सरपंच व ज़िला प्रशासन से अनुमति ले ली लेकिन संक्रमण के कारण विवाह संपन्न कराने के लिए कोई पंडित नहीं मिल रहा था। गश्त पर निकली झोतेश्वर की चौकी प्रभारी एसआई अंजली अग्निहोत्री ने गूगल का सहयोग लिया और विवाह पद्धती डाउनलोड कर उन्होंने मंत्रोच्चारण किया।

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Indusind Bank Myyindia: पुलिस इंस्पेक्टर सौरव तिवारी को शत्रुघ्न सिन्हा का शुक्रिया

हमारे मंच से फ़िल्म अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पुलिस इन्सपेक्टर सौरव तिवारी से बात की जो कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित मध्य प्रदेश के जबलपुर में तैनात हैं। ये इलाक़ा राज्य के कोरोना हॉटस्पॉट में से एक है।

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Indusind Bank Myyindia: पंजाब के पहले हॉटस्पॉट के वॉलेंटियर हरप्रीत सिंह के साथ शत्रुघ्न सिन्हा

जब पंजाब का पठलावा गांव कन्टेनमेंट ज़ोन घोषित कर सील कर दिया गया, तब शेष भारत कोविड-19 संकट की हक़ीक़तों के प्रति जागरूक ही हो रहा था।प्रशासन का सहयोग और मार्गदर्शन नहीं मिला तो हरप्रीत सिंह की अगुवाई में युवाओं की एक फ़ौज ने वॉलेंटियर ग्रुप बनाया और खुले दिल से समाज की सेवा और मदद में लग गए।

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वेदांत की भावभीनी प्रस्तुति: अशफाकुल्ला का ‘कभी वो दिन’

वेदांत भारद्वाज ने यह प्रस्तुति संकट से घिरे हमारे राष्ट्र के नायकों और मानववादियों को संबोधित है, उनकी बहादुरी और सब कुछ को बचाने सुरक्षित रखने की उनकी अटूट ज़िद को सलाम करती है।

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कोविड-19 के नायकों को सुरों की सलामी

डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त डॉक्टर सिद्धार्थ मुखर्जी सिद्ध वीणा पर एक प्यारी सी धुन बजा रहे हैं। यह सुंदर धुन उम्मीद जगा रही है और कोरोनावायरस से लड़ाई में सबसे आगे खड़े कार्यकर्ताओं को सलाम कर रही है।

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चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

अभिनेता इरफान खान को चाहने वाले हर दिल की आज यही आरजू है , बावजूद इस इल्म के, कि अब वे इस दुनिया से रुखसत ले चुके हैं ।इस वक्त, प्रशंसकों की नम आंखों के आगे इरफान जिंदगी के कई किरदार का रूप लिए गुजर रहे होंगे।

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हमारे सपनों का घोसला: फ़ैज़ के साथ ‘लॉकडाउन’

लेखक: प्रतिष्ठा श्रोत्रिय ख़ान और मुश्फ़िक ख़ान
हम दोनों शब्दों, किताबों और कविताओं के प्रेमी हैं; हमने ख़ुद को उन ढेर सारी किताबों के पन्नों में लॉकडाउन कर लिया है, जहां हमें तसल्ली और संतुष्टि मिलती है। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1911-1984) की एक कविता हक़ीक़त में हमसे बातें करती है।

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